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कानपुर एनकाउंटर पुलिस ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी का नतीजा IIIIIIII
July 3, 2020 • प्रदीप तिवारी  • यूपी
ये खूनी वारदात कानपुर के चौबेपुर थाना इलाके की है. जहां पुलिस बिकरू गांव में दबिश देकर कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को पकड़ने गई थी। उस पुलिस टीम का नेतृत्व बिल्हौर के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) देवेंद्र कुमार मिश्र कर रहे थे। 
 
कानपुर में गुरुवार की रात एक हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम पर जोरदार हमला किया गया। नतीजा ये निकला कि बदमाश पुलिस पर भारी पड़ गए. इस हमले में एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। जबकि सात पुलिसकर्मियों के घायल हो जाने की पुष्टि भी हुई है। इस पूरे मामले में पुलिस की प्लानिंग लीक होने और खुफिया तंत्र के कमजोर होने की आशंका को बल मिला है। 
 
 
जिस तरह से गांव के रास्ते पर एक जेसीबी मशीन को खड़ा किया गया था कि कोई भी गांव के अंदर वाहन लेकर दाखिल ना हो सके. उससे साफ है कि बदमाशों को पुलिस की आमद के बारे में जानकारी पहले ही मिल चुकी थी. लिहाजा डीएसपी मिश्रा ने अपने सहकर्मियों के साथ वाहनों से उतरकर पैदल ही गांव में दाखिल होने का फैसला किया। जैसे ही पुलिसवाले वाहनों से बाहर निकले। अचानक उन पर गोलियां बरसने लगी. पुलिसवाले संभल भी नहीं पाए कि तीन दिशाओं से उन पर फायरिंग होने लगी। 

नतीजा ये हुआ कि इस हमले में डीएसपी देवेंद्र कुमार मिश्र और एक एसएचओ समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए. इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब कई सवाल हैं, जिनके जवाब पुलिस को जांच के दौरान तलाश करने है. मसलन-

1. पुलिस को बदमाशों की योजना की भनक तक नहीं लगी, क्या पुलिस का मुखबिर और खुफिया तंत्र कमजोर था?
2. बदमाशों को पुलिस की प्लानिंग की जानकारी कैसे मिली? वो कौन था जिसने पुलिस की योजना विकास दुबे गैंग को बताई?
3. क्या यूपी पुलिस के बीच विकास दुबे के जासूस हैं, जो उसे अब तक बचाते रहे हैं?
4. इस हमले में एके47 जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया, हथियारों का इतना बड़ा जखीरा गांव में पहुंचा कैसे?
5. पुलिस के साथ आंख मिचौली खेलने वाला विकास दुबे योगी की सख्ती के बावजूद कैसे बचता रहा?