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हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी हत्याकांड का शनिवार को यूपी पुलिस ने किया खुलासा
October 19, 2019 • desk

कमलेश तिवारी हत्याकांड  का खुलासा 

रशीद पठान नाम का शख्स इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी है। यूपी पुलिस के डीजीपी ओपी सिंह ने शनिवार को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस मामले में अब तक तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है. ये तीनों इस हत्याकांड में शामिल रहे हैं।  इनके नाम हैं, रशीद अहमद पठान, मौलाना मोहसिन शेख और फैजान. रशीद अहमद पठान 23 साल का है। 

इससे पहले गुजरात एटीएस ने सूरत से पांच संदिग्धों को हिरासत में लिया था। कड़ी पूछताछ के बाद दो लोगों को गुजरात एटीएस ने छोड़ दिया था।

फोटो यूपी डीजीपी ओम प्रकाश सिंह

यूपी डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने प्रेस कॉन्फेंस करते हुए बताया कि पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज भी हाथ लगी थी, इसमें मिठाई खरीदते वक्त की सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की शिनाख्त की गई। डीजीपी की मानें तो कमलेश तिवारी हत्याकांड की साजिश रशीद शेख ने रची थी। मोइनुद्दीन पठान और अशफाक ने लखनऊ में कमलेश के घर आकर हत्याकाड को अंजाम दिया। डीजीपी ने बताया कि दो महीने से इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए साजिश रची जा रही थी। वहीं बताया जा रहा है कि मामले की जांच एनआईए को सौंपी जा सकती है।

हत्यारे सूरत के -
जानकारी के मुताबिक कमलेश तिवारी हत्याकांड के आरोपियों ने सूरत में ही भगवा कुर्ता सिलवाया था।  इसे पहनकर आरोपी लखनऊ आए और कत्ल को अंजाम दिया. शुक्रवार को घटनास्थल से मिले सीसीटीवी तस्वीरों में आरोपी भगवा कुर्ता में दिख रहे हैं। 

मिली थी सुरक्षा -

डीजीपी ओपी सिंह के मुताबिक कमलेश तिवारी को पूरी सुरक्षा दी गई थी।  उन्होंने कहा कि कमलेश तिवारी की सुरक्षा के साथ कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।  उन्होंने बताया कि कमलेश तिवारी को गनर और पुलिसमैन दिया गया था, और वे दोनों उसके साथ थे। 

 

बदमाशों ने कमलेश तिवारी को उनके दफ्तर में चाकूओं से हमला किया था। घटना की जानकारी मिलते ही उन्हें तत्काल ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, भगवा वस्त्र पहने हमलावर मिठाई का डिब्बा देने के बहाने खुर्शीद बाग इलाके में स्थित कमलेश तिवारी के कार्यालय में आए थे। 

कमलेश तिवारी पर पैगंबर मुहम्मद पर विवादास्पद टिप्पणी करने का आरोप था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया था।  हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उनके खिलाफ एनएसए रद्द कर दिया था।