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ऐंबुलेंस प्रभारी की शर्मनाक कारस्तानी से गई नवजात की जान
September 16, 2019 • पंकज द्विवेदी

ऐंबुलेंस को देने के लिए गरीब के पास नहीं थे हजार रुपए, नहीं दी ऑक्सीजन बाली ऐंबुलेंस


कोंच/जालौन 

कोंच सीएचसी में एक दिल दहला देने बाला शर्मनाक मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। बीमारी के चलते उरई रेफर किए गए नवजात बच्चे की जान सिर्फ इसलिए चली गई कि उसके पिता के पास ऑक्सीजन सिलिंडर से युक्त ऐंबुलेंस बाले को देने के लिए एक हजार रुपए नहीं थे जिसके चलते उस बच्चे को उरई ले जाने के लिए बिना ऑक्सीजन बाली ऐंबुलेंस दी गई जिसमें उरई पहुंचने से पहले ही नवजात ने दम तोड़ दिया।


योगी सरकार भ्रष्टïचार मुक्त शासन प्रशासन के कितने भी दावे कर ले लेकिन हकीकत यह है कि इस शासन में पहले के मुकाबले भ्रष्टïचार कई गुना बढा है जिसका असर आम जनता पर साफ देखने को मिल रहा है। योगी के भ्रष्टï तंत्र ने यहां एक मासूम की जान सिर्फ इसलिए ले ली कि सुविधा शुल्क के नाम पर मासूम का गरीब पिता एक हजार रुपए की व्यवस्था नहीं कर सका। शनिवार शाम तहसील क्षेत्र के ग्राम गोबद्र्घनपुरा के रहने बाले विक्रमसिंह की पत्नी रजनी को सुरक्षित प्रसव के लिए सीएचसी कोंच में भर्ती कराया गया था। महिला ने शाम लगभग पांच बजे एक सुंदर शिशु को जन्म दिया लेकिन उस नवजात शिशु की खराब हालत को देखते हुए सीएचसी प्रशासन ने उसे उरई ले जाने की सलाह बच्चे के परिजनों को दी। बच्चे को सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। उस समय सीएचसी में ऐंबुलेंस की दो गाडिय़ां खड़ी थीं जिनमें 108 ऐंबुलेंस गाड़ी नं. यूपी 32 बीयू 8650 जिसमें ऑक्सीजन उपलब्ध थी तथा यूपी 41 जी 1288 बिना ऑक्सीजन बाली थी। नवजात के परिजनों ने ईएमई इरफान सिद्दीकी से ऑक्सीजन सिलिंडर युक्त ऐंबुलेंस की मांग की ताकि बच्चे को ऑक्सीजन लगा कर उरई तक ले जाया जा सके लेकिन आरोप है कि ईएमई इरफान ने नवजात के पिता विक्रमसिंह से ऑक्सीजन बाली गाड़ी के लिए एक हजार रुपए मांगे जिसे देने में विक्रम ने असमर्थता जताई। पैसे नहीं देने के कारण बच्चे को उरई तक ले जाने के लिए बिना ऑक्सीजन बाली गाड़ी ले जानी पड़ी लेकिन बच्चे ने उरई पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और जितनी भी गाडिय़ां बिना ऑक्सीजन के खड़ी थीं, आनन फानन उरई भागी और ऑक्सीजन की कमियां पूरी कीं। बच्चे की इस तरह मौत हो जाने से उसके माता पिता और अन्य परिजन सदमे में हैं और भ्रष्टïतंत्र को लेकर वे काफी गुस्से में हैं। इस प्रकरण में इरफान सिद्दीकी अपने को पाक साफ बता रहे हैं, उनका कहना है कि सुविधा शुल्क मांगने का आरोप निराधार है।

ईएमई इरफान ने मांगे एक हजार-मुन्ना
नवजात की मौत के मामले में मृतक बच्चे के बाबा मुन्ना ने आरोप लगाया है कि ऑक्सीजन बाली ऐंबुलेंस के लिए ईएमई इरफान ने उसके भतीजे विक्रम से एक हजार रुपए मांगे थे लेकिन उसके असमर्थता जताने के बाद गुस्साए ईएमई ने बिना ऑक्सीजन बाली ऐंबुलेंस जानबूझ कर भेजी जिसके चलते उसके पौत्र की अकारण ही मौत हो गई। मुन्ना ने इस मौत के लिए पूरी तरह से इरफान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि मामले को वह ऊपर तक ले जाऐंगे।

अंबू बैग के सहारे क्षमता से भी अधिक दूरी तक पहुंचा नवजात
कोंच। जिस ऐंबुलेंस यूपी 41 जी 1288 में बच्चे को उरई ले जाया जा रहा था उसके एमटी राम यादव का कहना है कि बच्चे की खराब हालत को देखते हुए उसे अंबू बैग के सहारे वह ले गया। अंबू बैग की जो क्षमता है उसके सहारे सिर्फ दस किमी तक ही ले जाया जा सकता है लेकिन बच्चे को किसी तरह वह पच्चीस किमी तक ले गया। उसने यह भी बताया कि उसकी ऐंबुलेंस में न तो हूटर है, न एसी, न हॉर्न और न ही ऑक्सीजन। आए दिन गाड़ी रिपेयरिंग मांगती रहती है।

दो लड़कियों के बाद हुआ था लड़का
जिस नवजात की मौत हुई है वह माता पिता की तमाम मिन्नतों के बाद पैदा हुआ था। बताया गया है कि रजनी और विक्रम चौदह साल पूर्व विवाह बंधन में बंधे थे और उनकी इस दौरान दो संतानें हुई थीं और दोनों ही लड़कियां हैं। लड़के की हसरत में उन्होंने न जाने कितने देवी देवताओं की पूजा की और मन्नतें मांगीं। अंतत: ईश्वर ने उनकी सुन ली और शनिवार की शाम रजनी ने बेटे को जन्म भी दिया लेकिन भ्रष्टï तंत्र की बजह से उसका बेटा असमय ही काल के गाल में समा गया।